<?xml version="1.0" encoding="utf-8" ?><rss version="2.0" xmlns:tt="http://teletype.in/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><channel><title>@gyanjyot</title><generator>teletype.in</generator><description><![CDATA[@gyanjyot]]></description><link>https://teletype.in/@gyanjyot?utm_source=teletype&amp;utm_medium=feed_rss&amp;utm_campaign=gyanjyot</link><atom:link rel="self" type="application/rss+xml" href="https://teletype.in/rss/gyanjyot?offset=0"></atom:link><atom:link rel="next" type="application/rss+xml" href="https://teletype.in/rss/gyanjyot?offset=10"></atom:link><atom:link rel="search" type="application/opensearchdescription+xml" title="Teletype" href="https://teletype.in/opensearch.xml"></atom:link><pubDate>Tue, 22 Sep 2026 13:42:17 GMT</pubDate><lastBuildDate>Tue, 22 Sep 2026 13:42:17 GMT</lastBuildDate><item><guid isPermaLink="true">https://teletype.in/@gyanjyot/mv22sAoJnkQ</guid><link>https://teletype.in/@gyanjyot/mv22sAoJnkQ?utm_source=teletype&amp;utm_medium=feed_rss&amp;utm_campaign=gyanjyot</link><comments>https://teletype.in/@gyanjyot/mv22sAoJnkQ?utm_source=teletype&amp;utm_medium=feed_rss&amp;utm_campaign=gyanjyot#comments</comments><dc:creator>gyanjyot</dc:creator><title>क्या होता है कुंडली में कालसर्प दोष? कैसे करे उपाए</title><pubDate>Thu, 13 May 2021 06:37:43 GMT</pubDate><category>Astrologer</category><description><![CDATA[कालसर्प दोष हमेशा से ही भाग्य में आई कई कठिनाईयों का कारण रहा है | काल सर्प दोष से बचने एवं निवारण हेतु इसे विस्तार से समझना अति आवश्यक है | ज्योतिष शास्त्रानुसार kundali matching के समय &quot;कालसर्प&quot; दोष राहू का अधिदेवता 'काल' है तथा केतु का अधिदेवता 'सर्प' है। इन दोनों ग्रहों के बीच कुंडली में एक तरफ सभी ग्रह हों तो 'कालसर्प' दोष कहते हैं। राहू-केतु हमेशा वक्री चलते हैं तथा सूर्य चंद्रमार्गी। कालसर्प दोष अगर कुंडली में उत्पन्न हो जाए तो जल्द ही इसका उपाए ढूंढ़ना अनिवार्य हो जाता है अन्यथा जीवन में काफी आशंकाएँ और बाधाएं सामने आती जाती है |]]></description><content:encoded><![CDATA[
  <p>कालसर्प दोष हमेशा से ही भाग्य में आई कई कठिनाईयों का कारण रहा है | काल सर्प दोष से बचने एवं निवारण हेतु इसे विस्तार से समझना अति आवश्यक है | ज्योतिष शास्त्रानुसार <a href="https://www.jyotishgyanshiksha.com/index.html" target="_blank">kundali matching के समय &quot;कालसर्प&quot; दोष राहू</a> का अधिदेवता &#x27;काल&#x27; है तथा केतु का अधिदेवता &#x27;सर्प&#x27; है। इन दोनों ग्रहों के बीच कुंडली में एक तरफ सभी ग्रह हों तो &#x27;कालसर्प&#x27; दोष कहते हैं। राहू-केतु हमेशा वक्री चलते हैं तथा सूर्य चंद्रमार्गी। कालसर्प दोष अगर कुंडली में उत्पन्न हो जाए तो जल्द ही इसका उपाए ढूंढ़ना अनिवार्य हो जाता है अन्यथा जीवन में काफी आशंकाएँ और बाधाएं सामने आती जाती है |</p>
  <p>कोई इसे कालसर्प दोष कहता है तो कोई योग। कोई इसे मानता है और कोई नहीं, लेकिन कुंडली के शोध से पता चलता है कि जिनकी भी कुंडली में यह दोष पाया गया है, उसका जीवन या तो रंक जैसे गुजरता है या फिर राजा जैसा। शास्त्रानुसार कालसर्प दोष १२ प्रकार के बताये गए है | अनंत, कुलिक, वासुकि, शंखपाल, पद्द, महापद्द, तक्षक, कार्कोटक, शंखनाद, घातक, विषात्तक, शेषनाग | कालसर्प दोष को पहचानने के कई लक्षण होते है जैसे कि-</p>
  <p>·         जातक के सपने में प्रायः सर्प का दिखाई देना</p>
  <p>·         अत्यधिक परिश्रम के बाद भी इच्छानुसार फल कि प्राप्ति न होना</p>
  <p>·         पारिवारिक कलेश होना</p>
  <p>·         मानसिक तनाव से ग्रस्त होना</p>
  <p>·         विवाह में विलंब भी कालसर्प दोष का ही एक लक्षण है। यदि ऐसी स्थिति दिखाई दे तो निश्चित ही किसी <a href="https://www.jyotishgyanshiksha.com/index.html" target="_blank">विद्वान ज्योतिषी एवं kundali maker से सलाह</a> लेना चाहिए |</p>
  <p>·         कुछ ज्ञानी पंडितों अनुसार संतान सुख न होना भी कालसर्प दोष के ही लक्षण में से एक है |</p>
  <p>कालसर्प दोष के निवारण हेतु कई अचूक उपाए है | आइए <a href="https://www.jyotishgyanshiksha.com/index.html" target="_blank">ज्ञानी पंडित एवं विख्यात kundali maker</a> द्वारा जानते है कुछ सरल और असरदार उपाए |</p>
  <p>1. सोमवार के दिन भगवान शिवजी की शिवलिंग गंगाजल मिले जल से महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार लगातार 7 दिनों तक अभिषेक करने के बाद चंदन युक्त धूप, तेल, सुगंध अथवा इत्र अर्पित करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है ।</p>
  <p>2. आद्रा, स्वाती अथवा शतभिषा नक्षत्र में जटा वाला नारियल अपने ऊपर से 7 बार उतारकर बहते हुये जल में बहा दें । मन में यह भावना करें की कालसर्प दोष का प्रभाव हो रहा है ।</p>
  <p>3. लगातार 7 दिनों तक दिन के समय जब राहु काल हो तब मां सिंहिका का ध्यान करते हुए एक माला ‘नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करें।</p>
  <p>4. 7 दिनों तक अपनी सामर्थ्य के अनुसार बुधवार, शुक्रवार या फिर शनिवार के दिन राहु से संबंधित वस्तुएं जैसे सीसा, सरसों का तेल, तिल, कंबल, मछली, धारदार हथियार, स्वर्ण, नीलवर्ण वस्त्र, गोमेद, सूप, काले रंग के पुष्प, अभ्रक, दक्षिणा आदि का दान किसी सुपात्र वेद पाठी ब्राह्मन को दान करें।</p>
  <p>5. चंदन की माला से राहु के इस बीज मंत्र- ‘ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः’ का जप शिव मंदिर में जाकर करने से कालसर्प दोष की परेशानियों से तुरंत लाभ मिलता है ।</p>
  <p><strong>लेखककापरिचय</strong></p>
  <p>पंडित राजीव शास्त्री बहुत की गुणवान एवं विख्यात पंडितों में से एक है | इनके <a href="https://www.jyotishgyanshiksha.com/index.html" target="_blank">बताये हुए kundli matching in hindi एवं ज्योतिष</a> उपाए पूर्ण रूप से असरकारक और सुरक्षित है | आप इनसे कोई भी ज्योतिष जानकारी ज्ञान ज्योतिष के माध्यम से प्राप्त कर सकते है |</p>

]]></content:encoded></item><item><guid isPermaLink="true">https://teletype.in/@gyanjyot/bxSpUzhI1</guid><link>https://teletype.in/@gyanjyot/bxSpUzhI1?utm_source=teletype&amp;utm_medium=feed_rss&amp;utm_campaign=gyanjyot</link><comments>https://teletype.in/@gyanjyot/bxSpUzhI1?utm_source=teletype&amp;utm_medium=feed_rss&amp;utm_campaign=gyanjyot#comments</comments><dc:creator>gyanjyot</dc:creator><title>किन राशियों के लिए ख़ास होगी ये नवरात्री और क्यों?</title><pubDate>Mon, 19 Apr 2021 10:00:31 GMT</pubDate><description><![CDATA[नवरात्रि का हर दिन माँ दुर्गा को समर्पित है, नवरात्रि के नौ दिनों तक दुर्गा माँ के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा की जाती है, एवं kundali matching का अच्छा योग होता हैआदि शक्ति की आराधना का पर्व एक वर्ष में चार बार आता है।धर्म ग्रंथों एवं पुराणों के अनुसार, चैत्र नवरात्रभगवती दुर्गाजी की आराधना का श्रेष्ठ समय होता है।हिंदू पंचांग के अनुसार हिंदुओं के नव वर्ष की शुरुआत चैत्र नवरात्रि से होती है। माना जाता है कि चैत्र नवरात्रि में भगवान राम और माँ दुर्गा का जन्म हुआ था।]]></description><content:encoded><![CDATA[
  <p>नवरात्रि का हर दिन माँ दुर्गा को समर्पित है<strong>, </strong>नवरात्रि के नौ दिनों तक दुर्गा माँ के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा की जाती है<strong>, </strong><a href="https://www.jyotishgyanshiksha.com/index.html" target="_blank">एवं kundali matching का अच्छा योग होता हैआदि शक्ति</a> की आराधना का पर्व एक वर्ष में चार बार आता है।धर्म ग्रंथों एवं पुराणों के अनुसार<strong>, </strong>चैत्र नवरात्रभगवती दुर्गाजी की आराधना का श्रेष्ठ समय होता है।हिंदू पंचांग के अनुसार हिंदुओं के नव वर्ष की शुरुआत चैत्र नवरात्रि से होती है। माना जाता है कि चैत्र नवरात्रि में भगवान राम और माँ दुर्गा का जन्म हुआ था।</p>
  <p><strong>नवरात्रि में राशि पर प्रभाव :</strong></p>
  <p>पंडित राजीव शास्त्री जी के <a href="https://www.jyotishgyanshiksha.com/index.html" target="_blank">अनुसार kundli making के लिएहर भक्त सभी देवियों</a> की पूजा अर्चना करता है<strong>, </strong>जिससे उसे देवी माँ की कृपा भी प्राप्त होती है। पर क्या आप जानते हैं कि देवी माँ की पूजा की स्थिति भी आपकी राशि को काफी प्रभावित करती है। जैसे हर कुंडली में एक खास राशि और उसका स्वामी होता है<strong>, </strong>ऐसे ही हर राशि की एक खास या यूं कहें मुख्य देवी होती हैं। जिनकी पूजा हमें सर्वाधिक फल प्रदान करती है।</p>
  <p>चैत्र नवरात्रि में इन <strong>3 </strong>राशियों की किस्मत का तारा चमकेगाऔर उनके लिए हर तरह से लाभ के योग बनेंगे<strong>-</strong></p>
  <p>·         मकर राशि</p>
  <p>चैत्र नवरात्रि आपके लिए अनुकूल अवधि होगी| आपको पदोन्नति मिलने की संभावना है| एक उच्च संभावना है कि आपकी वित्तीय स्थिति में सुधार होगा<strong> |</strong></p>
  <p>·         कुंभ राशि</p>
  <p><a href="https://www.jyotishgyanshiksha.com/index.html" target="_blank">kundli matching in hindi अनुसारआपके सीनियर्स</a> आपके काम से प्रभावित होंगे| आने वाले दिनों में आप पर देवी दुर्गा की कृपा होगी| आपकी कुछ संपत्ति में निवेश करने की संभावना बन रही है और ये आपके लिए भविष्य में अच्छे परिणाम लाएगा|</p>
  <p>·         मीन राशि</p>
  <p>चैत्र नवरात्रि आपके लिए एक अद्भुत अवधि होगी. आपको एक बहुत जरूरी ब्रेक मिलेगा| आप अपने दोस्तों के साथ कुछ आकर्षक स्थान की यात्रा कर सकते हैं| जिनकी पूजा हमें सर्वाधिक फल प्रदान करती है।</p>
  <p><strong>नवरात्रि के राशि अनुसार उपाय :</strong></p>
  <p>ज्योतिष आचार्य राजीव शास्त्री जी अनुसार यदि नवरात्रि में राशि अनुसार विशेष उपाय किए जाएं तो माता की कृपा से भक्त की हर मनोकामना पूरी हो सकती है। इनमें से एक है अपनी मुख्य देवी की पूजा। जानकारों के अनुसार हर राशि की एक मुख्य देवी होती हैं<strong>, </strong>जिनकी पूजा करने से इस राशि के जातक को जल्दी और खास लाभ मिलते हैं<strong>|</strong></p>
  <p>मेष- इस राशि के लोगों के लिए मां स्कंदमाता की अराधना काफी फलदायी मानी जाती है। नवरात्र के नौ दिन दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें<strong>|</strong></p>
  <p>वृषभ- आपको माँ दुर्गा के महागौरी स्वरूप की उपासना करनी चाहिए। नवरात्र में ललिता सहस्र नाम का पाठ करें।</p>
  <p>मिथुन- इस राशि के लोगों को मां ब्रह्मचारिणी की उपासना करनी चाहिए। साथ ही तारा कवच का रोज पाठ करना चाहिए।</p>
  <p>कर्क- कर्क राशि के लोगों को मां शैलपुत्री की पूजा करनी चाहिए और नवरात्र में लक्ष्मी सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए<strong>|</strong></p>
  <p><strong>लेखक का परिचय</strong></p>
  <p>ज्योतिष आचार्य <a href="https://www.jyotishgyanshiksha.com/index.html" target="_blank">राजीव शास्त्री जी जाने-माने kundli maker ज्योतिषियों</a> में से एक हैं। वह ज्योतिष केंद्र, एस्ट्रोलॉजी, ज्योतिष शास्त्र सहित अंक ज्योतिष और जातकों को दोषमुक्त करने में उनकी सहायता की है| ये ज्ञान ज्योतिष द्वारा करते है एवं लोगों की समस्याओं का समाधान करते है|</p>

]]></content:encoded></item><item><guid isPermaLink="true">https://teletype.in/@gyanjyot/aZ8dAv9wI</guid><link>https://teletype.in/@gyanjyot/aZ8dAv9wI?utm_source=teletype&amp;utm_medium=feed_rss&amp;utm_campaign=gyanjyot</link><comments>https://teletype.in/@gyanjyot/aZ8dAv9wI?utm_source=teletype&amp;utm_medium=feed_rss&amp;utm_campaign=gyanjyot#comments</comments><dc:creator>gyanjyot</dc:creator><title>क्या महत्व है राशियाँ का आपके जीवन में?</title><pubDate>Tue, 30 Mar 2021 12:49:29 GMT</pubDate><description><![CDATA[·         जानिए राशिओ का महत्व -ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब भी किसी बच्चे का जन्म होता है तो उसी समय उसके भाग्य का फैसला उसी समय हो जाता है kundali maker  द्वारा । बच्चे के जन्म के समय ही ग्रहों और नक्षत्रों से उसकी राशि का निर्धारण हो जाता है। kundali matching ज्योतिष में राशि का विशेष महत्व होता है। राशियां ही जातक के जीवन पर गहरा प्रभाव डालती हैं। जातक की कुंडली में राशि का आकलन कर व्यक्ति के जीवन में उसकी सफलता और असफलता का पता चलता है। इसके अलावा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह भी जानकारी मिलती है कि किस राशि के लोग ज्यादा भाग्यशाली होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सभी 12 राशियों में कुछ राशियां ऐसी होती हैं जो ज्यादा भाग्यशाली और उनमें जल्दी धनवान बनने के गुण  होता है।]]></description><content:encoded><![CDATA[
  <p>·         <strong>जानिए राशिओ का महत्व</strong> -ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब भी किसी बच्चे का जन्म होता है तो उसी समय उसके भाग्य का फैसला उसी <a href="https://www.jyotishgyanshiksha.com/" target="_blank">समय हो जाता है kundali maker  द्वारा</a> । बच्चे के जन्म के समय ही ग्रहों और नक्षत्रों से उसकी राशि का निर्धारण हो जाता है। <a href="https://www.jyotishgyanshiksha.com/" target="_blank">kundali matching ज्योतिष में राशि का विशेष महत्व</a> होता है। राशियां ही जातक के जीवन पर गहरा प्रभाव डालती हैं। जातक की कुंडली में राशि का आकलन कर व्यक्ति के जीवन में उसकी सफलता और असफलता का पता चलता है। इसके अलावा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह भी जानकारी मिलती है कि किस राशि के लोग ज्यादा भाग्यशाली होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सभी 12 राशियों में कुछ राशियां ऐसी होती हैं जो ज्यादा भाग्यशाली और उनमें जल्दी धनवान बनने के गुण  होता है।</p>
  <p>·         <strong>राशियाँ</strong> <strong> की जानकारी- </strong>राशियाँ  <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%9A%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0" target="_blank">राशिचक्र</a> के उन बारह बराबर भागों को कहा जाता है जिन पर <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B7%E0%A5%80" target="_blank">ज्योतिषी</a> आधारित है। हर राशि <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF" target="_blank">सूरज</a> के  <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A4%A5" target="_blank">क्रांतिवृत्त</a> (ऍक्लिप्टिक) पर आने वाले एक <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B2" target="_blank">तारामंडल</a> से सम्बन्ध रखती है और उन दोनों का एक ही नाम होता है - जैसे की <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A5%E0%A5%81%E0%A4%A8_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF_%E0%A4%B8%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%95" target="_blank">मिथुन राशि</a> और <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A5%E0%A5%81%E0%A4%A8_%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B2" target="_blank">मिथुन तारामंडल</a>। यह बारह राशियां हैं -</p>
  <p>1.     <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B7_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF" target="_blank">मेष राशि</a></p>
  <p>2.     <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B5%E0%A5%83%E0%A4%B7_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF" target="_blank">वृष राशि</a></p>
  <p>3.     <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A5%E0%A5%81%E0%A4%A8_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF_%E0%A4%B8%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%95" target="_blank">मिथुन राशि</a></p>
  <p>4.     <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF" target="_blank">कर्क राशि</a></p>
  <p>5.     <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF" target="_blank">सिंह राशि</a></p>
  <p>6.     <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF" target="_blank">कन्या राशि</a></p>
  <p>7.     <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%BE_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF" target="_blank">तुला राशि</a></p>
  <p>8.     <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B5%E0%A5%84%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%95_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF" target="_blank">वॄश्चिक राशि</a></p>
  <p>9.     <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%A7%E0%A4%A8%E0%A5%81_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF" target="_blank">धनु राशि</a></p>
  <p>10. <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A4%95%E0%A4%B0_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF" target="_blank">मकर राशि</a></p>
  <p>11. <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%AD_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF" target="_blank">कुम्भ राशि</a></p>
  <p>12. <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A8_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF" target="_blank">मीन राशि</a></p>
  <p>·         <strong>राशियाँ का महत्व-</strong> इन बारह तारा समूह ज्योतिष के हिसाब से महत्वपूर्ण हैं। यदि पृथ्वी, सूरज के केन्द्र और पृथ्वी की परिक्रमा के तल को चारो तरफ ब्रम्हाण्ड में फैलायें, तो यह ब्रम्हाण्ड में एक तरह की पेटी सी बना लेगा। इस पेटी को हम १२ बराबर भागों में बांटें तो हम देखेंगे कि इन १२ भागों में कोई न कोई तारा समूह आता है। हमारी पृथ्वी और ग्रह, सूरज के चारों तरफ घूमते हैं या इसको इस तरह से कहें कि सूरज और सारे ग्रह पृथ्वी के सापेक्ष इन १२ तारा समूहों से गुजरते हैं। यह किसी अन्य तारा समूह के साथ नहीं होता है इसलिये यह १२ महत्वपूर्ण हो गये हैं। इस तारा समूह को हमारे पूर्वजों ने कोई न कोई आकृति दे दी <a href="https://www.jyotishgyanshiksha.com/" target="_blank">और इन्हे kundli matching in hindi द्वारा</a> राशियां कहा जाने लगा।</p>
  <p><strong>लेखक का परिचय </strong></p>
  <p>अरुण सहाए, <a href="https://www.jyotishgyanshiksha.com/" target="_blank">ये kundali maker ज्योतिष शास्त्र के बहुत बड़े ज्ञाता</a> है,एवम इन्हे सभी राशि का ज्ञान प्रसार करने में अत्यंत प्रसन्नता होती है, ये ज्ञान ज्योतिष की वेबसाइट पर पूर्ण विश्वास करते है एवं इसका उपाए की दुसरो को भी सलाह देते है|</p>
  <p><a href="https://www.jyotishgyanshiksha.com/" target="_blank">https://www.jyotishgyanshiksha.com/</a></p>

]]></content:encoded></item></channel></rss>