क्या होता है कुंडली में कालसर्प दोष? कैसे करे उपाए
कालसर्प दोष हमेशा से ही भाग्य में आई कई कठिनाईयों का कारण रहा है | काल सर्प दोष से बचने एवं निवारण हेतु इसे विस्तार से समझना अति आवश्यक है | ज्योतिष शास्त्रानुसार kundali matching के समय "कालसर्प" दोष राहू का अधिदेवता 'काल' है तथा केतु का अधिदेवता 'सर्प' है। इन दोनों ग्रहों के बीच कुंडली में एक तरफ सभी ग्रह हों तो 'कालसर्प' दोष कहते हैं। राहू-केतु हमेशा वक्री चलते हैं तथा सूर्य चंद्रमार्गी। कालसर्प दोष अगर कुंडली में उत्पन्न हो जाए तो जल्द ही इसका उपाए ढूंढ़ना अनिवार्य हो जाता है अन्यथा जीवन में काफी आशंकाएँ और बाधाएं सामने आती जाती है |
कोई इसे कालसर्प दोष कहता है तो कोई योग। कोई इसे मानता है और कोई नहीं, लेकिन कुंडली के शोध से पता चलता है कि जिनकी भी कुंडली में यह दोष पाया गया है, उसका जीवन या तो रंक जैसे गुजरता है या फिर राजा जैसा। शास्त्रानुसार कालसर्प दोष १२ प्रकार के बताये गए है | अनंत, कुलिक, वासुकि, शंखपाल, पद्द, महापद्द, तक्षक, कार्कोटक, शंखनाद, घातक, विषात्तक, शेषनाग | कालसर्प दोष को पहचानने के कई लक्षण होते है जैसे कि-
· जातक के सपने में प्रायः सर्प का दिखाई देना
· अत्यधिक परिश्रम के बाद भी इच्छानुसार फल कि प्राप्ति न होना
· पारिवारिक कलेश होना
· मानसिक तनाव से ग्रस्त होना
· विवाह में विलंब भी कालसर्प दोष का ही एक लक्षण है। यदि ऐसी स्थिति दिखाई दे तो निश्चित ही किसी विद्वान ज्योतिषी एवं kundali maker से सलाह लेना चाहिए |
· कुछ ज्ञानी पंडितों अनुसार संतान सुख न होना भी कालसर्प दोष के ही लक्षण में से एक है |
कालसर्प दोष के निवारण हेतु कई अचूक उपाए है | आइए ज्ञानी पंडित एवं विख्यात kundali maker द्वारा जानते है कुछ सरल और असरदार उपाए |
1. सोमवार के दिन भगवान शिवजी की शिवलिंग गंगाजल मिले जल से महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार लगातार 7 दिनों तक अभिषेक करने के बाद चंदन युक्त धूप, तेल, सुगंध अथवा इत्र अर्पित करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है ।
2. आद्रा, स्वाती अथवा शतभिषा नक्षत्र में जटा वाला नारियल अपने ऊपर से 7 बार उतारकर बहते हुये जल में बहा दें । मन में यह भावना करें की कालसर्प दोष का प्रभाव हो रहा है ।
3. लगातार 7 दिनों तक दिन के समय जब राहु काल हो तब मां सिंहिका का ध्यान करते हुए एक माला ‘नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करें।
4. 7 दिनों तक अपनी सामर्थ्य के अनुसार बुधवार, शुक्रवार या फिर शनिवार के दिन राहु से संबंधित वस्तुएं जैसे सीसा, सरसों का तेल, तिल, कंबल, मछली, धारदार हथियार, स्वर्ण, नीलवर्ण वस्त्र, गोमेद, सूप, काले रंग के पुष्प, अभ्रक, दक्षिणा आदि का दान किसी सुपात्र वेद पाठी ब्राह्मन को दान करें।
5. चंदन की माला से राहु के इस बीज मंत्र- ‘ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः’ का जप शिव मंदिर में जाकर करने से कालसर्प दोष की परेशानियों से तुरंत लाभ मिलता है ।
लेखककापरिचय
पंडित राजीव शास्त्री बहुत की गुणवान एवं विख्यात पंडितों में से एक है | इनके बताये हुए kundli matching in hindi एवं ज्योतिष उपाए पूर्ण रूप से असरकारक और सुरक्षित है | आप इनसे कोई भी ज्योतिष जानकारी ज्ञान ज्योतिष के माध्यम से प्राप्त कर सकते है |