
Сура 21, "Ал-Анбия" ("Пайгамбарлар"), 105 аятта, Биз окуйбуз: «Биз жерди Менин акылдуу кулдарым мурас кылат деп эскерткенден кийин Забурда жазганбыз».

Сура 21, "Ал-Анбия" ("Пайгамбарлар"), 105 аятта, Биз окуп: «Биз жер Менин акылдуу кулдар мурас деп эскерткенден кийин Псалтыри жазган».

Ваъда қилинган Жаннат қаерда бўлади? 21-сурада, «Анбиё» («Пайғамбарлар»), 105-оятда шундай дейилади: «Дарҳақиқат, Таврот (Забур)дан кейин, эслатма (зикр)да: “Ерга Менинг солиҳ бандаларим ворис бўлурлар”, деб ёзиб қўйганмиз».

21-surada, «Anbiyo» («Payg‘ambarlar»), 105-oyatda shunday deyiladi: «Darhaqiqat, Tavrot (Zabur)dan keyin, eslatma (zikr)da: “Yerga Mening solih bandalarim voris bo‘lurlar”, deb yozib qo‘yganmiz».

हमें यक़ीन है कि आपको अपने हिस्से की समस्याएँ हैं। हर किसी की होती हैं। पाठशाला में या कार्यस्थल पर, आप शायद ऐसी दिलचस्प समस्याओं का सामना करते होंगे जो आपके लिए एक चुनौती हों। यद्यपि, अन्य समस्याएँ ज़्यादा कष्टकर होती हैं। अगर आप ग़रीब हैं, तो सिर्फ़ रोटी कमाना ही एक निरन्तर चुनौती साबित हो सकती है। परिवार में किसी बीमारी के आने से मामला और भी बिगड़ जाता है। दुःखी विवाह, पूर्वधारणा, बेईमान धंधा, राजनीतिक हलचल और आर्थिक अनिश्चय से जीवन और अधिक कठिन हो जाता है।

तूफ़ानी बादल जमा हो रहे थे जब रामू अपने पड़ोसी के घर तक जानेवाले ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर सँभलकर जा रहा था। उसे कुछ घबराहट-सी महसूस हो रही थी। परीक्षा का समय नज़दीक़ आ चुका था, और वह गणित के कुछ पाठ समझ नहीं पा रहा था। उसकी माँ ने आग्रह किया था कि वह उनके पड़ोसी के पास जाकर उनकी मदद माँगे, पर रामू ने कभी मास्टरजी से बात नहीं की थी, जो कि शहर की एक पाठशाला में गणित सिखाया करते थे। माँ ने कहा था कि वह एक दोस्ताना क़िस्म का परिवार था और मदद करने में उन्हें खुशी होगी। आख़िर, क्या मास्टरजी की पत्नी ने माँ की यह हालत देखकर रॅशन की दुकान से उसका अनाज-दाना उठाकर नहीं लाया था?

तस्वीरों में दिखाए सभी लोगों की अत्यावश्यक ज़रूरतें हैं। खुद आपकी भी समान ज़रूरतें हैं। अपनी समस्याओं को हल करने के लिए आपको मदद की ज़रूरत है। आपको यह समझना ज़रूरी है कि ज़िन्दगी इतनी मुश्किल क्यों है। आपको ऐसी किसी बात की ज़रूरत है जो आपको भविष्य में विश्वास दिलाए। और आपको यह जानना ज़रूरी है कि आप परमेश्वर के उद्देश्यों में किस तरह उपयुक्त हो सकते हैं।

हमें यक़ीन है कि आपको अपने हिस्से की समस्याएँ हैं। हर किसी की होती हैं। पाठशाला में या कार्यस्थल पर, आप शायद ऐसी दिलचस्प समस्याओं का सामना करते होंगे जो आपके लिए एक चुनौती हों। यद्यपि, अन्य समस्याएँ ज़्यादा कष्टकर होती हैं। अगर आप ग़रीब हैं, तो सिर्फ़ रोटी कमाना ही एक निरन्तर चुनौती साबित हो सकती है। परिवार में किसी बीमारी के आने से मामला और भी बिगड़ जाता है। दुःखी विवाह, पूर्वधारणा, बेईमान धंधा, राजनीतिक हलचल और आर्थिक अनिश्चय से जीवन और अधिक कठिन हो जाता है।

Дар сураи 21 «ал-Анбиё» («Пайғамбарон») дар ояти 105 навишта шудааст: «Ва дар Забур пас аз панд навиштаем, ки бандагони солеҳи Ман вориси замин хоҳанд шуд»_*